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हमारे जीवन के लिए आशा का बहुमूल्यता

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द्वारा – सुमन कुमार

आशा हमारे भविष्य जीवन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। आज मैं आपके सामने यह कहानी पेश करना चाहती हूं। आसमान में दो पंछी उड़ रहे हैं। एक पंछी उड़ते हुए समुंदर के किनारे गिरता है । उसके पंख एकदम गीले हो जाते हैं, और गीले होने के कारण वह पंछी बहुत ज्यादा बीमार हो जाता है ।

तब दूसरा पंछी उसके पास आता है और उसे केहता है, सुन,  मेरे भाई, तू क्यों नहीं उड़ पा रहा है । बिमार् पंछी बोला कि, मेरे पास उड़ने के लिए पंख नहीं है और मैं बहुत दिनों से बीमार हूं। और दूसरे पंछी से पूछा, भाई तू कहां जा रहा है । दूसरा पंछी उत्तर दिया, मैं तो आज स्वर्ग जा रहा हूं, परमेश्वर से मिलने के लिए। बिमार् पंछी बोला, दोस्त, जब तू जा रहा है तो मेरा एक संदेश ले कर जाना।  परमेश्वर को बोलना कि मुझे फिर से पंख दे ताकि मैं उड़ कर तुम्हारे पास आ सकूं। 

दूसरा पंछी उसका संदेश लेकर उड़ जाता है । एक दिन के बाद् वापस लौट् कर बिमार् पंछी के पास आता है और बोलता है, अरे भाई, तूम अभी तक यही हैं । दूसरा पंछी कहता है, परमेश्वर ने यह संदेश भेजा है कि आने वाले दिनों में तूम नर्क में जाओगे । इसलिए तुम्हें एक काम करना है । तुम्हें बार बार – जो प्रभू करता है, अच्छा ही करता है 25 दिन रात, सुबह शाम हर समय बोलते ही रहना है ।

परमेश्वर को उसके ऊपर दया आ जाती है और उसके ऊपर खुश हो जाते हैं । फिर उस पंछी के नये पंख निकलने शुरू हो जाते हैं।  फिर वह बोलता है परमेश्वर जो तू करता है अच्छा ही करता है।  एक दिन वह पंछी आसमान में उड़ने लग जाता है ।

इस प्रकार से हम कहानी से ये सीखते हैं कि जो परमेश्वर के ऊपर विश्वास करता है, वह उसी प्रकार का प्रतिफल पाता है । इस पंछी के जीवन में आशा थी कि, 1 दिन वह उड़ पाएगा ।  इस पंछी को आशा थी एक दिन वह उठ कर अपने नए पंखों के साथ उड़ पाएगा ।

आज हम बीमार हैं, निराशा में हैं,  हताश हैं, लेकिन इस समय में हमारे आशा परमेश्वर के ऊपर स्थापीत करना आवश्यक है। पवित्र वचन कहता है, “चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूँ, तो भी हानि से न डरूँगा; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।” (Psalm 23:4) हमें यह एक आशा होना चाहिए कि, आंधी के बाद शांति जरूर आएगा ।

जब हम परमेश्वर के साथ बने रहते हैं वह हमें नयी आशा देता है, क्योंकि वह हमारा चरवाह है। “यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी। वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;” (Psalm 23:1, 2)। हमारा परमेश्वर भरपूरी सुखदाई देने वाला परमेश्वर है । भजन संहिता 91 कहता है परमेश्वर मेरा शरणस्थान है। अगर मैं उसके शरण में हूं, तो मुझे किसी चीज की निराशा नहीं हो सकती क्योंकि मैं परमेश्वर की शरण में हूं।

भजन संहिता 91 को अपने जीवन का आधार बनाऐ । मैं चाहे हॉस्पिटल में हूं, वह मेरा शरणस्थान है; मैं घर पर हूं, वह मेरा शरणस्थान है । मैं चाहे घोर अंधकार की तराई से होकर चलू, वह मेरा शरणस्थान है । हर एक महारोग में , हर एक जगह में यहोवा मेरा शरणस्थान है ।      

जब हम परमेश्वर पर आशा रखते है और परमेश्वर को अपना शरणस्थान मानते है तब हम अपने आने वाले जीवन में संभल सकते हैं, सुरक्षित रह सकते हैं । आइए हम सब परमेश्वर को हमारा शरणस्थान है। 

यहवो मेरा शरणस्थान है।