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Being Hopeful!

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लेखक – सुमन कुमार

हमें रचने वाला परमेश्वर अद्भुत है । उसके योजनाएं जिसने हमें बनाया है, जिसने हमें रचा है, अद्भुत है । एक समय की बात है, एक नगर में एक राजा होता है और उसके पास बहुत सारी प्रजा होती है । वह उन लोगों में से पांच लोगों को चुनता है, और उन्हें गमले देता है । वह हर एक गमलों के लिए एक बीज भी देता है । उनको एक महीने का समय दिया जाता है ।

वे उस बीजों को लेकर गमलों में उगाएँगे लेकिन, वे बाहर का कोई भी बीज नहीं खरीदेंगा । राजा का दिया बीज का ही प्रयोग करेंगे । तो वह सब के सब अपने घर में वापस चले जाते हैं । सब गमले में मिट्टी डालते हैं और बीज उगने का इंतिज़ार करते हैं । सब अपने अपने गमले को देखते हैं । वे देखना चाहते हैं की, गमले के अंदर पौधा आया कि नहीं । परंतु किसी के गमलों के अंदर, कुच्छ नहीं उगा था ।

वह सब के सब परेशान हो गए और सब योजना बनाने लगते हैं । जो राजा ने बीज दिया था, उसके बदले, वे दूसरा बीज बाहर से खरीद के उसको गमले में लगाएँगे । गमले में पौधे आने के बाद, सब राजा से मिलने जाएंगे ।

लेकिन उनमें से एक आदमी सोचता है, “राजा ने जो बीज दिया है केवल उसे ही उगाऊँगा चाहे वह बड़ा पौधा बने या ना बने” । इस प्रकार के कार्य के बाद, वह पांच जन राजा के सामने आते हैं । वह सब अपने अपने पौधे को राजा के सामने प्रस्तुत करते हैं । जब राजा सब के पौधों को देखता हैं, वे बहुत ही खुश हो जाता है । लेकिन एक आदमी के गमले में पौधा नहीं होता है । राजा उससे पूछता है, “तेरे गमले में पौधा क्यों नहीं है” । वह बड़े उदास चेहरे से, राजा को उत्तर देता है, “राजा जी जो आपने मुझे बीज दिया मैंने उसी बीज को गमले में लगाया । 1 महीने तक उसको खूब पानी दिया, खाद डाली लेकिन फिर भी उसके अंदर बीज का पौधा ना बना ।  राजा जी मैं यह काम ना कर सका” । कुछ देर चुप रह कर के राजा मुस्कुराते हुए बोला, “मैंने जो बीच तुम सबको दिए थे, वह तो नकली थे ।  वह कभी फल लाने वाले नहीं थे । मैंने तुम्हारे जीवन को जांचने की कोशिश की, कि तुम कितने आशावान हो” ।

आज इस कठिन परिस्थिति में हम लोग कितने आशावान हैं । क्या हम भी उसी तरह उन बीजों को बाजार से लेकर के शॉर्टकट लेने की कोशिश कर रहे हैं । या आशा लगाए बैठे हैं, उस एक व्यक्ति के जैसे कि एक-न-एक दिन गमले में पौधा आएगा ।

आज के दौर में बीमारी, दुःख, समस्याएं, और सताव होगा लेकिन, परमेश्वर हमारे साथ है । आशावान होने के लिए दो बातो का होना आवश्यक है।

1- डर ना होने से हम आशावान हो सकते हैं ।

भजन संहिता 23:4 कहता है, “चाहे मैं घोर अंधकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं तो भी हानि से ना डर लूंगा क्योंकि तू मेरे साथ रहता है तेरे छोटे और तेरी लाठी से मुझे शांति मिलती है ।”  परमेश्वर हमारे साथ में चलता है।  “अंधकार” – दुःख, मुसीबत, बीमारी, संकट को दर्शाता है । लेकिन एक विषय है जिसका हमें डर नहीं है । वह है, परमेश्वर हमारे साथ है । हम बीमारी, मुसीबतें, और दुख चाहे कुछ भी आए, हम अंधकार की हानि से नहीं डरेंगे । परमेश्वर हमारे जीवन में है । क्योंकि यह जीवन परमेश्वर ने हमें दिया है । भजन संहिता 23:4, तेरे सोटे और लाठी से शांति हमारे जीवन में मिलती है । आज दुख है, मुसीबत है, यह थोड़े समय के लिए अंधकार हो सकता है लेकिन शांति देने वाला परमेश्वर हमारे साथ है । कृपा देने वाला परमेश्वर हमारे साथ है । आशा देने वाला परमेश्वर है । आज हम डरे नहीं, हम भयभीत नहीं हो, क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है ।

2- परिस्थितियों को बताना, परिस्थितियों के समाधान के लिए प्रार्थना करना ।

भजन संहिता 22:19-20 परंतु हे यहोवा, तू दूर दूर ना रहे ! हे मेरे सहायक मेरी सहायता के लिए फुर्ति कर ! 20 मेरे प्राण को तलवार से बचा, मेरे प्राण को कुत्ते के पंजे से बचा ले । मुझे सिंह के मुंह से बचा ।आज जंगली सांडों की सिगो से से तूने मुझे बचा लिया है ।

हम हमारे हर एक परिस्थितियों को उसके सामने रखे, परमेश्वर ने हमें बनाया है ।  हमारे जीवन में डर ना रहे,  क्योंकि उसने हमें बनाया है । चाहे हम घोर अंधकार की तराई में से चले, चाहे हमारे जीवन में दुःख आए, या बीमारी में आक्रान्त हो,  तो भी हानि से ना डर, क्योंकि जीवन देने वाला महान परमेश्वर हमारे साथ है । जो इस संपूर्ण संसार का रचयिता है, उसकी हम रचना है । तो हमें किस विषय का डर, और किस विषय का भय होना चाहिए । 

आज इस दौर में हमारी प्रार्थना ऐसे होनी चाहिए, जैसे बाइबल कहती है ।

यहोवा तू दूर ना रहे । मुझको बनाने वाले परमेश्वर, तु मुझसे दूर ना रहे ।
तू मेरे प्राण को बचा । तू मेरे प्राण को संभाल, इस समय हर किसी को, हर एक व्यक्ति को । हम सबको डर है की हम अपने जीवन को खो देंगे । लेकिन यह कुछ क्षण के लिए है । हम सब ने अपने प्रियजनों को खोया है । हम इस जीवन डर में बीता रहे हैं ।
लेकिन हमारा परमेश्वर, जिसने हमें बनाया है, उसको हमारे जीवन पे संपूर्ण अधिकार है ।   लेकिन इस कठिन घड़ी में, हमारी प्रार्थना यह होनी चाहिए, अपने प्रिय लोगों के लिए , परमेश्वर तू हमें आशा दे । हमें जीवन दे और हमारे प्राणों की रक्षा कर ।